बिहारराज्य

रांची में साइबर ठगी के 3 मामले, वरिष्ठ नागरिक कार्ड और जीवित प्रमाणपत्र के नाम पर ₹11 लाख से ज्यादा की चपत

रांची
 साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए अब बैंकिंग सेवाओं और सरकारी सुविधाओं का सहारा ले रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक कार्ड बनवाने के नाम पर बैंक अधिकारी बनकर ओटीपी हासिल किया गया, तो जीवित प्रमाणपत्र तैयार कराने के बहाने फोन पर निजी जानकारी जुटाने का मामला सामने आया।

वहीं, एक महिला ने अपने बैंक खाते से बिना अनुमति 3.01 लाख रुपये के यूपीआइ लेनदेन की शिकायत की है। रांची में सामने आए इन तीन मामलों में कुल 11,04,125 रुपये की ठगी या अनधिकृत लेनदेन की शिकायत दर्ज कराई गई है।

वरिष्ठ नागरिक कार्ड के नाम पर चार बार में निकाले 4.11 लाख
लालपुर थाना क्षेत्र के वर्दमान कंपाउंड स्थित कोयल एन्क्लेव निवासी एंड्रियास सोरंग फेसबुक देख रहे थे। इसी दौरान वरिष्ठ नागरिक कार्ड से संबंधित एक पेज खुला, जिसमें मिलने वाले लाभ की जानकारी दी गई थी। पेज पर दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद वाट्सएप पर ऑडियो काल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया और कार्ड बनवाने के नाम पर बैंक खाते की जानकारी और पता मांगा।

एंड्रियास ने जानकारी साझा कर दी। रात करीब 9:01 बजे मोबाइल पर आया ओटीपी भी उन्होंने कॉल करने वाले को बता दिया। इसके बाद उनके खाते से चार बार में 4,11,500 रुपये निकल गए। रात 9:02 बजे दो लाख, 9:10 बजे एक लाख, 9:13 बजे एक लाख और 9:22 बजे 11,500 रुपये की निकासी हुई।

मोबाइल साइलेंट होने के कारण उन्हें तत्काल संदेशों का पता नहीं चला। बाद में एटीएम से रुपये निकालने का प्रयास विफल होने और बैंक में पासबुक अपडेट कराने पर खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली।

जीवित प्रमाणपत्र के नाम पर 3.91 लाख की ठगी
सिलवई बस्ती स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास रहने वाले अनूप लाल प्रसाद मंडल ने साइबर अपराध थाना में शिकायत की है कि जीवित प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर फोन कर उनकी निजी जानकारी हासिल की गई। उनके आवेदन के अनुसार दो नंबरों से कॉल आया। इसके बाद उनके बैंक खाते से रुपये कटने लगे।

खाते से कुल 3,91,625 रुपये की निकासी की शिकायत की गई है। उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

महिला के खाते से 3.01 लाख के अनधिकृत यूपीआई लेनदेन
शास्त्री नगर, कांके रोड निवासी रेखा मुखर्जी ने आरोप लगाया है कि उनके पंजाब नेशनल बैंक खाते से बिना जानकारी और अनुमति के 3,01,000 रुपये के यूपीआई लेनदेन हुए। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने न तो ये भुगतान किए और न ही यूपीआई पिन दर्ज कर किसी लेनदेन को अधिकृत किया। उन्होंने बैंक के कस्टमर केयर और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की।

साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां
ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न बताएं। बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर फोन करने वाला भी ये जानकारी मांगे, तो भरोसा करने से पहले संबंधित बैंक या विभाग के आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।

फेसबुक या सोशल मीडिया पर वरिष्ठ नागरिक कार्ड, पेंशन और सरकारी लाभ से जुड़े पेज पर दिए गए नंबरों की सत्यता जांचें। जीवित प्रमाणपत्र के लिए बैंक या संबंधित विभाग की अधिकृत प्रक्रिया अपनाएं। अंजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल न करें।

यूपीआई से भुगतान करते समय लाभार्थी का नाम और राशि जांचें। पैसे प्राप्त करने के लिए सामान्यत यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती। खाते से संदिग्ध रकम कटने पर तुरंत बैंक को सूचना दें, 1930 पर कॉल करें।

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